बरेली। 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही बहेड़ी सीट पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुस्लिम बहुल मानी जाने वाली इस सीट पर संभावित तीन मुस्लिम चेहरों की चर्चा ने चुनावी समीकरण को रोचक बना दिया है और समाजवादी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।
मौजूदा सपा विधायक अताउर रहमान अपने कार्यकाल, संगठनात्मक पकड़ और जमीनी नेटवर्क के बल पर दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, एआईएमआईएम की ओर से युवा नेता मो. शादाब एसके को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चाएं हैं, जिससे युवा मतदाताओं और सपा से नाराज वर्ग के एक हिस्से के खिसकने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे समीकरण में बहेड़ी के पूर्व चेयरमैन नसीम अहमद की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। 2017 के चुनाव में 66 हजार से अधिक वोट पाने वाले नसीम अहमद अपनी सामाजिक पकड़ और राजनीतिक अनुभव के चलते एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरते दिख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका रुख चुनावी माहौल की दिशा तय कर सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, बहेड़ी की लड़ाई अब सिर्फ पार्टी बनाम पार्टी नहीं रही, बल्कि वोटों के संभावित बिखराव और रणनीतिक पकड़ की लड़ाई बन चुकी है। सपा का परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक उसकी सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन एआईएमआईएम की संभावित एंट्री इस संतुलन को बदल सकती है।
आने वाले महीनों में तस्वीर और स्पष्ट होगी, लेकिन यदि तीन मुस्लिम चेहरों का यह सियासी त्रिकोण मैदान में उतरता है तो बहेड़ी की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
