बरेली। जनपद में खनन विभाग द्वारा 160% राजस्व वसूली का दावा भले ही कागजों पर रिकॉर्ड प्रदर्शन दिखा रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग ने 26 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 41.39 करोड़ रुपये वसूली की बात कही है, मगर इस उपलब्धि के पीछे अवैध खनन पर वास्तविक नियंत्रण कितना हुआ है, यह जांच का विषय बनता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के कई इलाकों में अब भी अवैध खनन और परिवहन का खेल जारी है। लगातार छापेमारी और कार्रवाई के दावों के बावजूद खनन माफिया सक्रिय नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है, जबकि वास्तविक स्तर पर अवैध गतिविधियों को पूरी तरह नहीं रोका जा सका है।
करीब 2.20 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला जाना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि अवैध खनन बड़े पैमाने पर जारी है। सवाल यह उठता है कि यदि कार्रवाई इतनी सख्त है, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में उल्लंघन कैसे सामने आ रहे हैं। वहीं, 60 से अधिक एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों पर प्रभावी नियंत्रण न होना भी विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
खनन अधिकारी द्वारा टीम पर हमलों की बात भी सामने आई है, जिससे यह साफ होता है कि जिले में खनन माफियाओं का दबदबा अब भी कायम है। सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कमजोरी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राजस्व बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध खनन को जड़ से समाप्त करना अधिक जरूरी है। अगर विभाग वास्तव में प्रभावी होता, तो इतनी बड़ी संख्या में अवैध मामलों और हमलों की घटनाएं सामने नहीं आतीं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन सवालों का जवाब कैसे देता है और क्या भविष्य में केवल आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर भी सुधार दिखाई देगा या नहीं।
