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February 4, 2026

बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद: जुमे की नमाज के बाद सड़कों पर उतरी सैकड़ों लोगों की भीड़

राष्ट्र जगत संवाददाता

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद ने शुक्रवार को तूल पकड़ लिया। जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने शहर के विभिन्न इलाकों जैसे श्यामगंज और नौमहला मस्जिद के आसपास तोड़फोड़ की, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां को घर में नजरबंद कर दिया गया है। शहर में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं और इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है।यह विवाद हाल ही में कानपुर में बरावाफत जुलूस के दौरान एक बैनर से शुरू हुआ था, जहां ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। बरेली में मौलाना तौकीर रजा ने गुरुवार को ही जुमे पर इस्लामिया मैदान में धरना देने का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन ने अनुमति न देने के बाद प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। इसके बावजूद, नमाज के बाद भीड़ सड़कों पर उतर आई।घटनाक्रम: कैसे बिगड़ा माहौल?सुबह से सख्ती: जुमे की नमाज से पहले ही बरेली के इस्लामिया मैदान, बिहारीपुर और श्यामगंज इलाकों को छावनी में बदल दिया गया। बैरिकेडिंग लगाई गई, ड्रोन से निगरानी की गई और भारी संख्या में पीएसी व आरएएफ की टुकड़ियां तैनात की गईं। सैलानी इलाका पूरी तरह बंद रहा।नमाज के बाद हंगामा: नौमहला मस्जिद के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए। ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर थामे लोग नारेबाजी करने लगे। श्यामगंज में पुलिस ने जुलूस को रोकने की कोशिश की, तो एसपी क्राइम उत्कर्ष मिश्रा से नोकझोंक हो गई। भीड़ ने दुकानों पर पथराव किया और तोड़फोड़ मचाई।पुलिस का जवाब: स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। कई प्रदर्शनकारी घायल बताए जा रहे हैं। डीएम रवि कुमार और एसएसपी घुरमौरिया ने कहा कि शांति भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।तौकीर रजा नजरबंद: मौलाना तौकीर रजा को उनके ठाकुरद्वारा स्थित घर में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने राष्ट्रपति को डीएम के माध्यम से ज्ञापन भेजने की अपील की थी, जिसमें शांतिपूर्ण विरोध की बात कही गई। लेकिन प्रशासन ने किसी भी जोखिम से बचने के लिए यह कदम उठाया।

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