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March 19, 2026

गुरूग्राम

सनातन दर्शन की नई व्याख्या “सृष्टिदर्शन” का भव्य विमोचन, गुरुग्राम में जुटे देशभर के विद्वान


गुरुग्राम। साहित्यिक एवं आध्यात्मिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण उस समय साकार हुआ, जब “सचेतना तृतीय वार्षिकोत्सव – सनातन साहित्य सम्मान एवं समागम” के अवसर पर साहित्यिक सचेतना मंच के संस्थापक एवं मार्गदर्शक गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी के प्रथम ग्रंथ “सृष्टिदर्शन” का भव्य विमोचन किया गया। इस गरिमामय समारोह में देशभर से आए साहित्यकारों, चिंतकों, विद्वानों एवं सनातन संस्कृति के अनुयायियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
यह ग्रंथ “सृष्टिदर्शन” सनातन सत्य, अद्वैत दर्शन और चेतना-विज्ञान पर आधारित एक गहन दार्शनिक कृति है, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है। इसमें वेद, उपनिषद एवं गीता के आधार पर सृष्टि, आत्मा, चेतना और मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल एवं तार्किक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
ग्रंथ में “ॐ तत् सत्” के वैदिक रहस्य को केंद्र में रखते हुए सृष्टि के चार आयाम—आत्मा, प्राण, प्रकृति और पदार्थ—तथा मानव जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किस प्रकार सनातन सिद्धांत आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय स्थापित कर मानव जीवन को संतुलित और जागरूक बना सकते हैं।
अपने उद्बोधन में गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी ने कहा कि यह ग्रंथ केवल ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि मानव चेतना के जागरण और सत्य की अनुभूति की दिशा में एक वैचारिक आंदोलन है। उन्होंने जोर दिया कि सनातन दर्शन व्यक्ति को स्वयं से जोड़कर समग्र अस्तित्व से एकत्व का अनुभव कराता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और साहित्यकारों ने “सृष्टिदर्शन” को समकालीन समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक, प्रेरणादायक एवं मार्गदर्शक कृति बताते हुए इसकी सराहना की और इसे भविष्य में वैचारिक जागरण का आधार स्तंभ बताया।
यह ग्रंथ अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Amazon पर उपलब्ध है, जिससे देश-विदेश के पाठक इसे आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। आयोजकों ने पाठकों से अपील की है कि पुस्तक का अध्ययन करने के बाद अपनी समीक्षा अवश्य साझा करें, ताकि यह महत्वपूर्ण कृति अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।