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February 4, 2026

संपादकीय

डिजिटल इंडिया, AI और साइबर अपराध: अवसरों के साथ बढ़ती चुनौतियाँ


भारत तेजी से डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर रहा है। आज सरकारी सेवाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और व्यापार तक लगभग हर क्षेत्र डिजिटल मंचों पर आ चुका है। इसी डिजिटल क्रांति का अगला चरण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जो कार्यप्रणाली को तेज, सटीक और अधिक प्रभावी बना रहा है। लेकिन तकनीक के इस विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।
AI आज प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ा रहा है, किसानों को मौसम की जानकारी दे रहा है, डॉक्टरों को बीमारी पहचानने में मदद कर रहा है और उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है। स्टार्टअप संस्कृति को भी AI से नया बल मिला है। ‘डिजिटल इंडिया’ ने आम नागरिक को सशक्त किया है—आज मोबाइल से ही राशन कार्ड, आयुष्मान, आधार, बैंकिंग और सरकारी शिकायतें संभव हैं। यह बदलाव भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति दिला रहा है।
परंतु इसी डिजिटल निर्भरता ने अपराध की नई दुनिया भी रच दी है। फिशिंग, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग, डेटा चोरी, डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं। आम नागरिक ही नहीं, बल्कि बैंक, अस्पताल और सरकारी संस्थान भी साइबर हमलों के निशाने पर हैं। चिंता का विषय यह है कि AI का दुरुपयोग कर अपराधी और अधिक शातिर तरीके से लोगों को ठग रहे हैं, जिससे सत्य और असत्य में अंतर करना कठिन होता जा रहा है।
आज आवश्यकता है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए। स्कूल स्तर से साइबर जागरूकता, मजबूत डेटा संरक्षण कानून, त्वरित साइबर न्याय प्रणाली और पुलिस-प्रशासन को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही नागरिकों को भी अनजान लिंक, फर्जी कॉल और संदिग्ध ऐप्स से सतर्क रहना होगा।

एड. सौरभ शर्मा
प्रधान संपादक
राष्ट्र जगत दैनिक अखबार

संपादकीय: लोक परंपरा, प्रकृति और उल्लास का पर्व — लोहड़ी


लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और सामूहिक उल्लास का जीवंत उत्सव है। विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में मनाया जाने वाला यह पर्व नई फसल के स्वागत, सूर्य के उत्तरायण होने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है। यह त्योहार यह संदेश देता है कि मानव जीवन प्रकृति के साथ सामंजस्य से ही सुखी और समृद्ध बन सकता है।
लोहड़ी की संध्या पर प्रज्ज्वलित अग्नि केवल अलाव नहीं होती, बल्कि वह आशा, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होती है। लोग इसके चारों ओर एकत्र होकर तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं। ये परंपराएं केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि किसान संस्कृति और श्रम के सम्मान का भाव भी प्रकट करती हैं। यह वह समय होता है जब किसान अपनी मेहनत के फल के लिए प्रकृति और ईश्वर का आभार व्यक्त करता है।
लोहड़ी हमें यह भी सिखाती है कि जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का नाम नहीं, बल्कि सामूहिक खुशियों और सामाजिक जुड़ाव से ही जीवन पूर्ण होता है। लोक गीतों, भांगड़ा-गिद्धा जैसे नृत्यों और आपसी मिलन के माध्यम से यह पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नई संतानों, नए विवाह और नए आरंभों का स्वागत लोहड़ी को और भी विशेष बना देता है।
आज के समय में जब समाज तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिकता के दबाव से गुजर रहा है, लोहड़ी जैसे लोक पर्व हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर देते हैं। ये त्योहार हमें सादगी, प्रकृति से जुड़ाव और साझा उल्लास का महत्व समझाते हैं। वास्तव में, लोहड़ी केवल आग के चारों ओर घूमने का पर्व नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और संस्कृति को जीवंत रखने का उत्सव है। यही इसकी सबसे बड़ी सार्थकता और समृद्धि है।

एड. सौरभ शर्मा
संपादक / चेयरमैन
राष्ट्र जगत दैनिक अखबार
मो. 7017533033