डिजिटल इंडिया, AI और साइबर अपराध: अवसरों के साथ बढ़ती चुनौतियाँ
भारत तेजी से डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर रहा है। आज सरकारी सेवाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और व्यापार तक लगभग हर क्षेत्र डिजिटल मंचों पर आ चुका है। इसी डिजिटल क्रांति का अगला चरण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जो कार्यप्रणाली को तेज, सटीक और अधिक प्रभावी बना रहा है। लेकिन तकनीक के इस विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।
AI आज प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ा रहा है, किसानों को मौसम की जानकारी दे रहा है, डॉक्टरों को बीमारी पहचानने में मदद कर रहा है और उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है। स्टार्टअप संस्कृति को भी AI से नया बल मिला है। ‘डिजिटल इंडिया’ ने आम नागरिक को सशक्त किया है—आज मोबाइल से ही राशन कार्ड, आयुष्मान, आधार, बैंकिंग और सरकारी शिकायतें संभव हैं। यह बदलाव भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति दिला रहा है।
परंतु इसी डिजिटल निर्भरता ने अपराध की नई दुनिया भी रच दी है। फिशिंग, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग, डेटा चोरी, डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं। आम नागरिक ही नहीं, बल्कि बैंक, अस्पताल और सरकारी संस्थान भी साइबर हमलों के निशाने पर हैं। चिंता का विषय यह है कि AI का दुरुपयोग कर अपराधी और अधिक शातिर तरीके से लोगों को ठग रहे हैं, जिससे सत्य और असत्य में अंतर करना कठिन होता जा रहा है।
आज आवश्यकता है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए। स्कूल स्तर से साइबर जागरूकता, मजबूत डेटा संरक्षण कानून, त्वरित साइबर न्याय प्रणाली और पुलिस-प्रशासन को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही नागरिकों को भी अनजान लिंक, फर्जी कॉल और संदिग्ध ऐप्स से सतर्क रहना होगा।
एड. सौरभ शर्मा
प्रधान संपादक
राष्ट्र जगत दैनिक अखबार