(पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर विशेष)
जहां भी देश में बहादुरी और सादगी की बात होती है, वहां स्वतः ही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम स्मरण हो जाता है। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उस महान व्यक्तित्व को नमन कर रहा है, जिन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा नेता वही होता है जो कथनी नहीं, करनी में विश्वास रखता है।
लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपने प्रधानमंत्री काल में न केवल देश का नेतृत्व किया, बल्कि अपने आचरण से जनता के सामने सादगी और ईमानदारी की मिसाल पेश की। उनके जीवन का हर क्षण देशसेवा को समर्पित रहा। कहा जाता है कि उनके घर में काम करने वाले कर्मचारियों को भी वे अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते थे और स्वयं अपने कपड़े धोकर पहनते थे।
1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान जब देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब शास्त्री जी ने देशवासियों से सप्ताह में एक समय भोजन त्याग करने की अपील की थी, ताकि अन्न की बचत हो सके। स्वयं भी उन्होंने इसका पालन किया। यही नहीं, युद्ध के समय उन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर देश के जवानों और किसानों का मनोबल बढ़ाया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
शास्त्री जी की सादगी का सबसे बड़ा उदाहरण यह था कि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भी उनके बैंक खाते में बहुत कम राशि थी। ताशकंद समझौते के बाद 11 जनवरी 1966 को उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी रहस्य बनी हुई है, लेकिन उनके विचार और आदर्श अमर हैं।
देश आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। लाल बहादुर शास्त्री जैसे ईमानदार, निडर और सादगीपूर्ण प्रधानमंत्री मिलना देश के लिए गर्व की बात है। वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
