बरेली। ब्रह्मपुरी में चल रही 166वीं ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार को रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। लीला का प्रारम्भ गुरु व्यास मुनेश्वर जी के भावपूर्ण वर्णन से हुआ, जिसमें उन्होंने बताया कि पक्षिराज जटायु को जलांजलि देने के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण सीता की खोज में दक्षिण दिशा की ओर निकल पड़े।
मार्ग में दोनों भाई एक घने वन में पहुँचे, जहाँ उनका सामना राक्षस कबंध से हुआ। कबंध ने उन्हें पम्पा सरोवर जाने और ऋष्यमूक पर्वत पर रहने वाले वानरराज सुग्रीव से मित्रता करने का सुझाव दिया। इसके बाद राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत पहुँचे, जहाँ उनकी पहली भेंट हनुमान जी से हुई और फिर सुग्रीव से मुलाकात हुई।
सुग्रीव से मित्रता के बाद भगवान श्रीराम ने एक ही बाण से बाली का वध कर सुग्रीव को भयमुक्त कर दिया। बाली के निधन के बाद सुग्रीव किष्किन्धा के राजा बने और अंगद को युवराज बनाया गया। इसके पश्चात सुग्रीव ने असंख्य वानरों को माता सीता की खोज में विभिन्न दिशाओं में भेजा।
इसी क्रम में हनुमान जी समुद्र लांघ कर लंका पहुँचे और अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ दी और रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर कई राक्षसों का संहार किया। बाद में मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र से उन्हें बंदी बनाकर रावण के दरबार में प्रस्तुत किया, जहाँ दंडस्वरूप उनकी पूँछ में आग लगवा दी गई। परंतु हनुमान जी ने उसी जलती पूँछ से पूरी लंका को अग्नि के हवाले कर दिया और सकुशल लौट आए।
लीला प्रभारी अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि आज के मंचन में सेतु बंधन, समुद्र पार करना और अंगद-रावण संवाद की झलक भी दर्शकों को देखने को मिली। उन्होंने बताया कि मंगलवार को लक्ष्मण को शक्ति लगना और कुंभकर्ण वध की लीला का मंचन किया जाएगा।
रामलीला समिति के अध्यक्ष राजू मिश्रा ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी पदाधिकारियों और रामभक्तों का आभार व्यक्त किया।
