विकासखंड बिलसंडा के अकराबाद ग्राम में पंचवर्षीय कार्यकाल में ग्राम निधि का जमकर किया बंदरबांट: प्रधान दिलीप कुमार व सचिव इबरार पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
राष्ट्र जगत संवाददातापीलीभीत। विकासखंड बिलसंडा के ग्राम अकराबाद के ग्रामप्रधान दिलीप कुमार और ग्राम सचिव इबरार अहमद पर ग्राम निधि के घोर दुरुपयोग व बंदरबांट के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे पंचवर्षीय कार्यकाल में विकास के नाम पर सिर्फ कागजों में लीपापोती की गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। इससे गांव की बुनियादी सुविधाएं बदहाल बनी रहीं और ग्राम निधि का लाखों रुपये का गबन कर लिया गया।ग्रामीणों ने बताया कि पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, पेयजल योजना व ग्रामीण विकास निधि से लाखों रुपये प्राप्त हुए। लेकिन इनका उपयोग सड़क निर्माण, नाली सफाई, हैंडपंप स्थापना, सामुदायिक भवन व पशुधन हाट जैसी बुनियादी जरूरतों पर नहीं किया गया। गांव की मुख्य सड़क टूटी-फूटी पड़ी है, नालियां उफान पर हैं ग्रामप्रधान व सचिव इबरार अहमद ने आपस में मिलकर टेंडर प्रक्रिया का मजाक उड़ाया। ठेकेदारों से कमीशन लेकर फर्जी बिल पास कराए गए। ग्राम सभा की बैठकें नाममात्र की हुईं, जहां
लेखा_जोखा पेश ही नहीं किया गया।विकास के नाम पर जो कागज दिखाए जाते हैं, वे ज्यादातर फर्जी हैं। मनरेगा के तहत मजदूरों को काम तो दिया गया, लेकिन मजूरी का भुगतान महीनों लेट होता रहा। अंत में पैसे प्रधान के चहेतों तक सीमित रह गए।” महिलाओं ने भी आवाज उठाई कि आंगनबाड़ी केंद्र व शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार चरम पर रहा। सचिव इबरार ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर निधि का गैर-कानूनी उपयोग किया फिलहाल मामला गरमाता जा रहा है।
पीलीभीत। विकासखंड बिलसंडा के ग्राम अकराबाद के ग्रामप्रधान दिलीप कुमार और ग्राम सचिव इबरार अहमद पर ग्राम निधि के घोर दुरुपयोग व बंदरबांट के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे पंचवर्षीय कार्यकाल में विकास के नाम पर सिर्फ कागजों में लीपापोती की गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। इससे गांव की बुनियादी सुविधाएं बदहाल बनी रहीं और ग्राम निधि का लाखों रुपये का गबन कर लिया गया।ग्रामीणों ने बताया कि पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, पेयजल योजना व ग्रामीण विकास निधि से लाखों रुपये प्राप्त हुए। लेकिन इनका उपयोग सड़क निर्माण, नाली सफाई, हैंडपंप स्थापना, सामुदायिक भवन व पशुधन हाट जैसी बुनियादी जरूरतों पर नहीं किया गया। गांव की मुख्य सड़क टूटी-फूटी पड़ी है, नालियां उफान पर हैं ग्रामप्रधान व सचिव इबरार अहमद ने आपस में मिलकर टेंडर प्रक्रिया का मजाक उड़ाया। ठेकेदारों से कमीशन लेकर फर्जी बिल पास कराए गए। ग्राम सभा की बैठकें नाममात्र की हुईं, जहां
लेखा_जोखा पेश ही नहीं किया गया।विकास के नाम पर जो कागज दिखाए जाते हैं, वे ज्यादातर फर्जी हैं। मनरेगा के तहत मजदूरों को काम तो दिया गया, लेकिन मजूरी का भुगतान महीनों लेट होता रहा। अंत में पैसे प्रधान के चहेतों तक सीमित रह गए।” महिलाओं ने भी आवाज उठाई कि आंगनबाड़ी केंद्र व शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार चरम पर रहा। सचिव इबरार ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर निधि का गैर-कानूनी उपयोग किया फिलहाल मामला गरमाता जा रहा है।
